हमारे विद्यार्थियों की सफलता की कहानियाँ
जानिए कैसे गृहणियों और सिलाई सीखने वालों ने आत्मनिर्भर बनकर अपना बुटीक और व्यवसाय शुरू किया।
सुनीता शर्मा
📍 इंदौर, मध्य प्रदेश • 🎓 आत्मनिर्भर लेडीज टेलरिंग मास्टरक्लास
"राधिका मैम के तीरा और मुड्ढा फॉर्मूले ने मेरी जिंदगी बदल दी। पहले आर्महोल में झोल आने से कस्टमर नाराज होते थे, अब मेरे सिले ब्लाउज पहली बार में ही परफेक्ट बैठते हैं।"
सुनीता जी इंदौर की रहने वाली एक गृहणी हैं। शादी के बाद वे अपने परिवार को आर्थिक संबल देना चाहती थीं, लेकिन छोटे बच्चों के कारण बाहर जाकर काम करना संभव नहीं था।
उन्होंने राधिका ट्यूटोरियल्स का आत्मनिर्भर लेडीज टेलरिंग कोर्स जॉइन किया। मात्र 2 महीने के अंदर उन्होंने पेपर कटिंग और कटोरी ब्लाउज की बारीकियों को समझा। आज वे अपने घर के एक कमरे से अपना बुटीक चला रही हैं और उनके पास 50 से अधिक नियमित ग्राहक हैं।
पूजा वर्मा
📍 भोपाल, मध्य प्रदेश • 🎓 ब्लाउज विशेषज्ञ मास्टरक्लास
"प्रिंसेस कट और पैडेड ब्लाउज सिलने में मुझे हमेशा डर लगता था। राधिका ट्यूटोरियल्स के स्टेप-बाय-स्टेप गाइडेंस के बाद अब मैं ब्राइडल लहंगे के ब्लाउज आसानी से सिलती हूँ।"
पूजा जी भोपाल में सिलाई का काम करती थीं, लेकिन भारी वर्क वाले ब्राइडल ब्लाउज काटने में झिझकती थीं।
राधिका ट्यूटोरियल्स के ब्लाउज स्पेशलिस्ट कोर्स से उन्होंने सीखा कि महंगे सिल्क और जरी वाले कपड़ों पर बिना किसी गलती के कटिंग कैसे की जाती है। आज वे भोपाल के कई बुटीक के लिए जॉब-वर्क ब्लाउज तैयार करती हैं।
मीना कंवर
📍 जयपुर, राजस्थान • 🎓 जीरो-टू-हीरो बेसिक सिलाई कोर्स
"मुझे सिलाई मशीन में धागा डालना भी नहीं आता था। राधिका मैम ने इतने प्यार और धैर्य से सिखाया कि आज मैं अपने बच्चों की ड्रेस और अपने सूट खुद सिल लेती हूँ।"
मीना जी जयपुर की रहने वाली हैं। वे हमेशा से अपनी पसंद के कपड़े खुद तैयार करना चाहती थीं।
जीरो-टू-हीरो बेसिक कोर्स से उन्होंने सिलाई मशीन की बेसिक सेटिंग, सीधी सिलाई, पेटीकोट और सादा कुर्ती बनाना सीखा। अब उन्हें छोटी-छोटी सिलाई और फिटिंग के लिए टेलर के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।